श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.11

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

स्मृता त्वयापि चात्रैव मुक्तिरायाति याति च।

पुत्रीकृत्य त्वयेमौ च पार्श्वे स्वस्यैव रक्षितौ॥ ११

smṛtā tvayāpi cātraiva muktirāyāti yāti ca|

putrīkṛtya tvayemau ca pārśve svasyaiva rakṣitau|| 11

अर्थ

इस लोकमें भी तुम्हारे स्मरण करनेसे ही वह आती है और फिर चली जाती है; किंतु इन ज्ञान-वैराग्यको तुमने पुत्र मानकर अपने पास ही रख छोड़ा है॥ ११॥

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