॥ श्रीहरिः ॥
कलौ मुक्तिः क्षयं प्राप्ता पाखण्डामयपीडिता।
त्वदाज्ञया गता शीघ्रं वैकुण्ठं पुनरेव सा॥ १०
kalau muktiḥ kṣayaṃ prāptā pākhaṇḍāmayapīḍitā|
tvadājñayā gatā śīghraṃ vaikuṇṭhaṃ punareva sā|| 10
अर्थ
कलियुगमें तुम्हारी दासी मुक्ति पाखण्डरूप रोगसे पीड़ित होकर क्षीण होने लगी थी, इसलिये वह तो तुरन्त ही तुम्हारी आज्ञासे वैकुण्ठलोकको चली गयी॥ १०॥
कलौ मुक्तिः क्षयं प्राप्ता पाखण्डामयपीडिता।
त्वदाज्ञया गता शीघ्रं वैकुण्ठं पुनरेव सा॥ १०
कलियुगमें तुम्हारी दासी मुक्ति पाखण्डरूप रोगसे पीड़ित होकर क्षीण होने लगी थी, इसलिये वह तो तुरन्त ही तुम्हारी आज्ञासे वैकुण्ठलोकको चली गयी॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 41) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/10/