सूतजीने कहा—शौनकजी! तुम्हारे हृदयमें भगवान्का प्रेम है; इसलिये मैं विचारकर तुम्हें सम्पूर्ण सिद्धान्तोंका निष्कर्ष सुनाता हूँ, जो जन्म-मृत्युके भयका नाश कर देता है॥ ९॥
प्रीतिः शौनक चित्ते ते ह्यतो वच्मि विचार्य च।
सर्वसिद्धान्तनिष्पन्नं संसारभयनाशनम्॥ ९
सूतजीने कहा—शौनकजी! तुम्हारे हृदयमें भगवान्का प्रेम है; इसलिये मैं विचारकर तुम्हें सम्पूर्ण सिद्धान्तोंका निष्कर्ष सुनाता हूँ, जो जन्म-मृत्युके भयका नाश कर देता है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 34) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/9/