श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.9

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सूत उवाच

प्रीतिः शौनक चित्ते ते ह्यतो वच्मि विचार्य च।

सर्वसिद्धान्तनिष्पन्‍नं संसारभयनाशनम्॥ ९

prītiḥ śaunaka citte te hyato vacmi vicārya ca|

sarvasiddhāntaniṣpannaṃ saṃsārabhayanāśanam|| 9

अर्थ

सूतजीने कहा—शौनकजी! तुम्हारे हृदयमें भगवान्‌का प्रेम है; इसलिये मैं विचारकर तुम्हें सम्पूर्ण सिद्धान्तोंका निष्कर्ष सुनाता हूँ, जो जन्म-मृत्युके भयका नाश कर देता है॥ ९॥

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