श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.69

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एकाकारं कलिं दृष्ट्वा सारवत्सारनीरसम्।

विष्णुरातः स्थापितवान् कलिजानां सुखाय च॥ ६९

ekākāraṃ kaliṃ dṛṣṭvā sāravatsāranīrasam|

viṣṇurātaḥ sthāpitavān kalijānāṃ sukhāya ca|| 69

अर्थ

इस प्रकार सारहीन होनेपर भी उसे इस एक ही दृष्टिसे सारयुक्त देखकर उन्होंने कलियुगमें उत्पन्‍न होनेवाले जीवोंके सुखके लिये ही इसे रहने दिया था॥ ६९॥

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