श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.68

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

यत्फलं नास्ति तपसा न योगेन समाधिना।

तत्फलं लभते सम्यक्कलौ केशवकीर्तनात्॥ ६८

yatphalaṃ nāsti tapasā na yogena samādhinā|

tatphalaṃ labhate samyakkalau keśavakīrtanāt|| 68

अर्थ

क्योंकि जो फल तपस्या, योग एवं समाधिसे भी नहीं मिलता, कलियुगमें वही फल श्रीहरिकीर्तनसे ही भलीभाँति मिल जाता है॥ ६८॥

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