॥ श्रीहरिः ॥
कथं परीक्षिता राज्ञा स्थापितो ह्यशुचिः कलिः।
प्रवृत्ते तु कलौ सर्वसारः कुत्र गतो महान्॥ ६३
kathaṃ parīkṣitā rājñā sthāpito hyaśuciḥ kaliḥ|
pravṛtte tu kalau sarvasāraḥ kutra gato mahān|| 63
अर्थ
भक्तिने कहा—राजा परीक्षित्ने इस पापी कलियुगको क्यों रहने दिया? इसके आते ही सब वस्तुओंका सार न जाने कहाँ चला गया?॥ ६३॥
कथं परीक्षिता राज्ञा स्थापितो ह्यशुचिः कलिः।
प्रवृत्ते तु कलौ सर्वसारः कुत्र गतो महान्॥ ६३
भक्तिने कहा—राजा परीक्षित्ने इस पापी कलियुगको क्यों रहने दिया? इसके आते ही सब वस्तुओंका सार न जाने कहाँ चला गया?॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 38) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/63/