श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.45

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

बालोवाच

अहं भक्तिरिति ख्याता इमौ मे तनयौ मतौ।

ज्ञानवैराग्यनामानौ कालयोगेन जर्जरौ॥ ४५

ahaṃ bhaktiriti khyātā imau me tanayau matau|

jñānavairāgyanāmānau kālayogena jarjarau|| 45

अर्थ

युवतीने कहा—मेरा नाम भक्ति है, ये ज्ञान और वैराग्य नामक मेरे पुत्र हैं। समयके फेरसे ही ये ऐसे जर्जर हो गये हैं॥ ४५॥

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