श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.41

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

दृष्ट्वा दूराद्गतः सोऽहं कौतुकेन तदन्तिकम्।

मां दृष्ट्वा चोत्थिता बाला विह्वला चाब्रवीद्वचः॥ ४१

dṛṣṭvā dūrādgataḥ so'haṃ kautukena tadantikam|

māṃ dṛṣṭvā cotthitā bālā vihvalā cābravīdvacaḥ|| 41

अर्थ

दूरसे यह सब चरित देखकर मैं कुतूहलवश उसके पास चला गया। मुझे देखकर वह युवती खड़ी हो गयी और बड़ी व्याकुल होकर कहने लगी॥ ४१॥✎ 1954

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1954 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दशों → दसों

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