दूरसे यह सब चरित देखकर मैं कुतूहलवश उसके पास चला गया। मुझे देखकर वह युवती खड़ी हो गयी और बड़ी व्याकुल होकर कहने लगी॥ ४१॥✎ 1954
दृष्ट्वा दूराद्गतः सोऽहं कौतुकेन तदन्तिकम्।
मां दृष्ट्वा चोत्थिता बाला विह्वला चाब्रवीद्वचः॥ ४१
दूरसे यह सब चरित देखकर मैं कुतूहलवश उसके पास चला गया। मुझे देखकर वह युवती खड़ी हो गयी और बड़ी व्याकुल होकर कहने लगी॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 36) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1954 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दशों → दसों