श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.16

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

क्‍व सुधा क्‍व कथा लोके क्‍व काचः क्‍व मणिर्महान्।

ब्रह्मरातो विचार्यैवं तदा देवाञ्जहास ह॥ १६

kva sudhā kva kathā loke kva kācaḥ kva maṇirmahān|

brahmarāto vicāryaivaṃ tadā devāñjahāsa ha|| 16

अर्थ

इस संसारमें कहाँ काँच और कहाँ महामूल्य मणि तथा कहाँ सुधा और कहाँ कथा? श्रीशुकदेवजीने (यह सोचकर) उस समय देवताओंकी हँसी उड़ा दी॥ १६॥

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