दूधके दाँत गिर जानेपर वरुणने कहा—‘अब इस यज्ञपशुके दाँत गिर गये, मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्चन्द्रने कहा—‘जब इसके दुबारा दाँत आ जायँगे, तब यह पशु यज्ञके योग्य हो जायगा’॥ १३॥✎ 16372046
पशोर्निपतिता दन्ता यजस्वेत्याह सोऽब्रवीत्।
यदा पशोः पुनर्दन्ता जायन्तेऽथ पशुः शुचिः॥ १३
दूधके दाँत गिर जानेपर वरुणने कहा—‘अब इस यज्ञपशुके दाँत गिर गये, मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्चन्द्रने कहा—‘जब इसके दुबारा दाँत आ जायँगे, तब यह पशु यज्ञके योग्य हो जायगा’॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 39) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/7/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)