॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.6.26
भार्याशतेन निर्विण्ण ऋषयोऽस्य कृपालवः।
इष्टिं स्म वर्तयांचक्रुरैन्द्रीं ते सुसमाहिताः॥ २६
bhāryāśatena nirviṇṇa ṛṣayo'sya kṛpālavaḥ|
iṣṭiṃ sma vartayāṃcakruraindrīṃ te susamāhitāḥ|| 26
अर्थ
निकुम्भके बर्हणाश्व, उसके कृशाश्व, कृशाश्वके सेनजित् और सेनजित्के युवनाश्व नामक पुत्र हुआ। युवनाश्व सन्तानहीन था, इसलिये वह बहुत दुःखी होकर अपनी सौ स्त्रियोंके साथ वनमें चला गया। वहाँ ऋषियोंने बड़ी कृपा करके युवनाश्वसे पुत्रप्राप्तिके लिये बड़ी एकाग्रताके साथ इन्द्रदेवताका यज्ञ कराया॥ २५-२६॥✎ 1636