तदनन्तर राजा इक्ष्वाकुने अपने गुरुदेव वसिष्ठसे ज्ञानविषयक चर्चा की। फिर योगके द्वारा शरीरका परित्याग करके उन्होंने परमपद प्राप्त किया॥ १०॥
स तु विप्रेण संवादं जापकेन समाचरन्।
त्यक्त्वा कलेवरं योगी स तेनावाप यत् परम्॥ १०
तदनन्तर राजा इक्ष्वाकुने अपने गुरुदेव वसिष्ठसे ज्ञानविषयक चर्चा की। फिर योगके द्वारा शरीरका परित्याग करके उन्होंने परमपद प्राप्त किया॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 32) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/6/10/