श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.5.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

संवत्सरोऽत्यगात् तावद् यावता नागतो गतः।

मुनिस्तद्दर्शनाकांक्षो राजाऽब्भक्षो बभूव ह॥ २३

saṃvatsaro'tyagāt tāvad yāvatā nāgato gataḥ|

munistaddarśanākāṃkṣo rājā'bbhakṣo babhūva ha|| 23

अर्थ

परीक्षित्! जब सुदर्शन चक्रसे भयभीत होकर दुर्वासाजी भगे थे, तबसे लेकर उनके लौटनेतक एक वर्षका समय बीत गया। इतने दिनोंतक राजा अम्बरीष उनके दर्शनकी आकांक्षासे केवल जल पीकर ही रहे॥ २३॥

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