॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.4.50
तमन्वधावद् भगवद्रथांगं
दावाग्निरुद्धूतशिखो यथाहिम्।
तथानुषक्तं१ मुनिरीक्षमाणो
गुहां विविक्षुः प्रससार मेरोः॥ ५०
tamanvadhāvad bhagavadrathāṃgaṃ
dāvāgniruddhūtaśikho yathāhim|
tathānuṣaktaṃ munirīkṣamāṇo
guhāṃ vivikṣuḥ prasasāra meroḥ|| 50
अर्थ
जैसे ऊँची-ऊँची लपटोंवाला दावानल साँपके पीछे दौड़ता है, वैसे ही भगवान्का चक्र उनके पीछे-पीछे दौड़ने लगा। जब दुर्वासाजीने देखा कि चक्र तो मेरे पीछे लग गया है, तब सुमेरु पर्वतकी गुफामें प्रवेश करनेके लिये वे उसी ओर दौड़ पड़े॥ ५०॥
टिप्पणियाँ
- १
थावसक्तं।