श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.48

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

प्राग्दिष्टं भृत्यरक्षायां पुरुषेण महात्मना।

ददाह कृत्यां तां चक्रं क्रुद्धाहिमिव पावकः॥ ४८

prāgdiṣṭaṃ bhṛtyarakṣāyāṃ puruṣeṇa mahātmanā|

dadāha kṛtyāṃ tāṃ cakraṃ kruddhāhimiva pāvakaḥ|| 48

अर्थ

परमपुरुष परमात्माने अपने सेवककी रक्षाके लिये पहलेसे ही सुदर्शन चक्रको नियुक्त कर रखा था। जैसे आग क्रोधसे गुर्राते हुए साँपको भस्म कर देती है, वैसे ही चक्रने दुर्वासाजीकी कृत्याको जलाकर राखका ढेर कर दिया॥ ४८॥

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