श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

स इत्थं भक्तियोगेन तपोयुक्तेन पार्थिवः।

स्वधर्मेण हरिं प्रीणन् संगान् सर्वाञ्छनैर्जहौ॥ २६

sa itthaṃ bhaktiyogena tapoyuktena pārthivaḥ|

svadharmeṇa hariṃ prīṇan saṃgān sarvāñchanairjahau|| 26

अर्थ

राजा अम्बरीष इस प्रकार तपस्यासे युक्त भक्तियोग और प्रजापालनरूप स्वधर्मके द्वारा भगवान्‌को प्रसन्‍न करने लगे और धीरे-धीरे उन्होंने सब प्रकारकी आसक्तियोंका परित्याग कर दिया॥ २६॥

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