श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यस्य क्रतुषु गीर्वाणैः सदस्या ऋत्विजो जनाः।

तुल्यरूपाश्‍चानिमिषा व्यदृश्यन्त सुवाससः॥ २३

yasya kratuṣu gīrvāṇaiḥ sadasyā ṛtvijo janāḥ|

tulyarūpāścānimiṣā vyadṛśyanta suvāsasaḥ|| 23

अर्थ

उनके यज्ञोंमें देवताओंके साथ जब सदस्य और ऋत्विज् बैठ जाते थे, तब उनकी पलकें नहीं पड़ती थीं और वे अपने सुन्दर वस्त्र और वैसे ही रूपके कारण देवताओंके समान दिखायी पड़ते थे॥ २३॥

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