उनकी मायाका विलास ही जीवके जन्म, जीवन और मृत्युका कारण है। और उनका अनुग्रह ही मायाको अलग करके आत्मस्वरूपको प्राप्त करनेवाला है॥ ५८॥✎ 1396
यन्मायाचेष्टितं पुंसः स्थित्युत्पत्त्यप्ययाय हि।
अनुग्रहस्तन्निवृत्तेरात्मलाभाय चेष्यते॥ ५८
उनकी मायाका विलास ही जीवके जन्म, जीवन और मृत्युका कारण है। और उनका अनुग्रह ही मायाको अलग करके आत्मस्वरूपको प्राप्त करनेवाला है॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.24.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 117) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/24/58/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)