॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.54
कीर्तिमन्तं सुषेणं च भद्रसेनमुदारधीः।
ऋजुं सम्मर्दनं भद्रं संकर्षणमहीश्वरम्॥ ५४
kīrtimantaṃ suṣeṇaṃ ca bhadrasenamudāradhīḥ|
ṛjuṃ sammardanaṃ bhadraṃ saṃkarṣaṇamahīśvaram|| 54
अर्थ
देवरक्षिताके गर्भसे गद आदि नौ पुत्र हुए तथा जैसे स्वयं धर्मने आठ वसुओंको उत्पन्न किया था, वैसे ही वसुदेवजीने सहदेवाके गर्भसे पुरुविश्रुत आदि आठ पुत्र उत्पन्न किये। परम उदार वसुदेवजीने देवकीके गर्भसे भी आठ पुत्र उत्पन्न किये, जिनमें सातके नाम हैं—कीर्तिमान्, सुषेण, भद्रसेन, ऋजु, संमर्दन, भद्र और शेषावतार श्रीबलरामजी॥ ५२—५४॥