श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

क्रथस्य कुन्तिः पुत्रोऽभूद् धृष्टिस्तस्याथ निर्वृतिः।

ततो दशार्हो नाम्‍नाभूत् तस्य व्योमः सुतस्ततः॥ ३

krathasya kuntiḥ putro'bhūd dhṛṣṭistasyātha nirvṛtiḥ|

tato daśārho nāmnābhūt tasya vyomaḥ sutastataḥ|| 3

अर्थ

क्रथका पुत्र हुआ कुन्ति, कुन्तिका धृष्टि, धृष्टिका निर्वृति, निर्वृतिका दशार्ह और दशार्हका व्योम॥ ३॥

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