॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.15
श्वफल्कश्चित्ररथश्च गान्दिन्यां च श्वफल्कतः।
अक्रूरप्रमुखा आसन् पुत्रा द्वादश विश्रुताः॥ १५
śvaphalkaścitrarathaśca gāndinyāṃ ca śvaphalkataḥ|
akrūrapramukhā āsan putrā dvādaśa viśrutāḥ|| 15
अर्थ
इसी सत्यकके पुत्र युयुधान थे, जो सात्यकिके नामसे प्रसिद्ध हुए। सात्यकिका जय, जयका कुणि और कुणिका पुत्र युगन्धर हुआ। अनमित्रके तीसरे पुत्रका नाम वृष्णि था। वृष्णिके दो पुत्र हुए—श्वफल्क और चित्ररथ। श्वफल्ककी पत्नीका नाम था गान्दिनी। उनमें सबसे श्रेष्ठ अक्रूरके अतिरिक्त बारह पुत्र उत्पन्न हुए—आसंग, सारमेय, मृदुर, मृदुविद्, गिरि, धर्मवृद्ध, सुकर्मा, क्षेत्रोपेक्ष, अरिमर्दन, शत्रुघ्न, गन्धमादन और प्रतिबाहु। इनके एक बहिन भी थी, जिसका नाम था सुचीरा। अक्रूरके दो पुत्र थे—देववान् और उपदेव। श्वफल्कके भाई चित्ररथके पृथु, विदूरथ आदि बहुत-से पुत्र हुए—जो वृष्णिवंशियोंमें श्रेष्ठ माने जाते हैं॥ १४-१८॥✎ 1650