श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

शिबेश्‍चत्वार एवासंस्तितिक्षोश्‍च रुशद्रथः।

ततो हेमोऽथ सुतपा बलिः सुतपसोऽभवत्॥ ४

śibeścatvāra evāsaṃstitikṣośca ruśadrathaḥ|

tato hemo'tha sutapā baliḥ sutapaso'bhavat|| 4

अर्थ

उशीनरके चार पुत्र थे—शिबि, वन, शमी और दक्ष। शिबिके चार पुत्र हुए—बृषादर्भ, सुवीर, मद्र और कैकेय। उशीनरके भाई तितिक्षुके रुशद्रथ, रुशद्रथके हेम, हेमके सुतपा और सुतपाके बलि नामक पुत्र हुआ॥ ३-४॥✎ 1649

यह अर्थ श्लोक 3–4 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1649 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ययाति-नन्दन → ययातिनन्दन

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