श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

शिबिर्वनः शमिर्दक्षश्‍चत्वारोशीनरात्मजाः।

वृषादर्भः सुवीरश्‍च मद्रः कैकेय आत्मजाः॥ ३

śibirvanaḥ śamirdakṣaścatvārośīnarātmajāḥ|

vṛṣādarbhaḥ suvīraśca madraḥ kaikeya ātmajāḥ|| 3

अर्थ

उशीनरके चार पुत्र थे—शिबि, वन, शमी और दक्ष। शिबिके चार पुत्र हुए—बृषादर्भ, सुवीर, मद्र और कैकेय। उशीनरके भाई तितिक्षुके रुशद्रथ, रुशद्रथके हेम, हेमके सुतपा और सुतपाके बलि नामक पुत्र हुआ॥ ३-४॥✎ 1649

यह अर्थ श्लोक 3–4 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1649 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ययाति-नन्दन → ययातिनन्दन

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