॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.22.5
सुहोत्रोऽभूत् सुधनुषश्च्यवनोऽथ ततः कृती।
वसुस्तस्योपरिचरो बृहद्रथमुखास्ततः॥ ५
suhotro'bhūt sudhanuṣaścyavano'tha tataḥ kṛtī|
vasustasyoparicaro bṛhadrathamukhāstataḥ|| 5
अर्थ
सुधन्वासे सुहोत्र, सुहोत्रसे च्यवन, च्यवनसे कृती, कृतीसे उपरिचरवसु और उपरिचरवसुसे बृहद्रथ आदि कई पुत्र उत्पन्न हुए॥ ५॥