श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तपत्यां सूर्यकन्यायां कुरुक्षेत्रपतिः कुरुः।

परीक्षित् सुधनुर्जह्नुर्निषधाश्‍वः कुरोः सुताः॥ ४

tapatyāṃ sūryakanyāyāṃ kurukṣetrapatiḥ kuruḥ|

parīkṣit sudhanurjahnurniṣadhāśvaḥ kuroḥ sutāḥ|| 4

अर्थ

संवरणका विवाह सूर्यकी कन्या तपतीसे हुआ। उन्हींके गर्भसे कुरुक्षेत्रके स्वामी कुरुका जन्म हुआ। कुरुके चार पुत्र हुए—परीक्षित्, सुधन्वा, जह्नु और निषधाश्‍व॥ ४॥

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