॥ श्रीहरिः ॥
भविता सहदेवस्य मार्जारिर्यच्छ्रुतश्रवाः।
ततोऽयुतायुस्तस्यापि निरमित्रोऽथ तत्सुतः॥ ४६
bhavitā sahadevasya mārjāriryacchrutaśravāḥ|
tato'yutāyustasyāpi niramitro'tha tatsutaḥ|| 46
अर्थ
जरासन्धके पुत्र सहदेवसे मार्जारि, मार्जारिसे श्रुतश्रवा, श्रुतश्रवासे अयुतायु और अयुतायुसे निरमित्र नामक पुत्र होगा॥ ४६॥
भविता सहदेवस्य मार्जारिर्यच्छ्रुतश्रवाः।
ततोऽयुतायुस्तस्यापि निरमित्रोऽथ तत्सुतः॥ ४६
जरासन्धके पुत्र सहदेवसे मार्जारि, मार्जारिसे श्रुतश्रवा, श्रुतश्रवासे अयुतायु और अयुतायुसे निरमित्र नामक पुत्र होगा॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.22.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 108) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/22/46/