श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.46

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

भविता सहदेवस्य मार्जारिर्यच्छ्रुतश्रवाः।

ततोऽयुतायुस्तस्यापि निरमित्रोऽथ तत्सुतः॥ ४६

bhavitā sahadevasya mārjāriryacchrutaśravāḥ|

tato'yutāyustasyāpi niramitro'tha tatsutaḥ|| 46

अर्थ

जरासन्धके पुत्र सहदेवसे मार्जारि, मार्जारिसे श्रुतश्रवा, श्रुतश्रवासे अयुतायु और अयुतायुसे निरमित्र नामक पुत्र होगा॥ ४६॥

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