श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.45

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

क्षेमकं प्राप्य राजानं संस्थां प्राप्स्यति वै कलौ।

अथ मागधराजानो भवितारो वदामि ते॥ ४५

kṣemakaṃ prāpya rājānaṃ saṃsthāṃ prāpsyati vai kalau|

atha māgadharājāno bhavitāro vadāmi te|| 45

अर्थ

यह वंश कलियुगमें राजा क्षेमकके साथ ही समाप्त हो जायगा। अब मैं भविष्यमें होनेवाले मगध देशके राजाओंका वर्णन सुनाता हूँ॥ ४५॥

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