श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.15

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तस्य त्रिभुवनाधीशाः फलदाः फलमिच्छताम्।

आत्मानं दर्शयाञ्चक्रुर्माया विष्णुविनिर्मिताः॥ १५

tasya tribhuvanādhīśāḥ phaladāḥ phalamicchatām|

ātmānaṃ darśayāñcakrurmāyā viṣṇuvinirmitāḥ|| 15

अर्थ

परीक्षित्! ये अतिथि वास्तवमें भगवान्‌की रची हुई मायाके ही विभिन्‍न रूप थे। परीक्षा पूरी हो जानेपर अपने भक्तोंकी अभिलाषा पूर्ण करनेवाले त्रिभुवनस्वामी ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों उनके सामने प्रकट हो गये॥ १५॥✎ 881

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #881 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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