परीक्षित्! ये अतिथि वास्तवमें भगवान्की रची हुई मायाके ही विभिन्न रूप थे। परीक्षा पूरी हो जानेपर अपने भक्तोंकी अभिलाषा पूर्ण करनेवाले त्रिभुवनस्वामी ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों उनके सामने प्रकट हो गये॥ १५॥✎ 881
तस्य त्रिभुवनाधीशाः फलदाः फलमिच्छताम्।
आत्मानं दर्शयाञ्चक्रुर्माया विष्णुविनिर्मिताः॥ १५
परीक्षित्! ये अतिथि वास्तवमें भगवान्की रची हुई मायाके ही विभिन्न रूप थे। परीक्षा पूरी हो जानेपर अपने भक्तोंकी अभिलाषा पूर्ण करनेवाले त्रिभुवनस्वामी ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों उनके सामने प्रकट हो गये॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 101) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/21/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)