‘कमलदलके समान सुन्दर नेत्रोंवाली देवि! तुम कौन हो और किसकी पुत्री हो? मेरे हृदयको अपनी ओर आकर्षित करनेवाली सुन्दरी! तुम इस निर्जन वनमें रहकर क्या करना चाहती हो?॥ ११॥✎ 1646
का त्वं कमलपत्राक्षि कस्यासि हृदयंगमे।
किं वा चिकीर्षितं त्वत्र भवत्या निर्जने वने॥ ११
‘कमलदलके समान सुन्दर नेत्रोंवाली देवि! तुम कौन हो और किसकी पुत्री हो? मेरे हृदयको अपनी ओर आकर्षित करनेवाली सुन्दरी! तुम इस निर्जन वनमें रहकर क्या करना चाहती हो?॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 96) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/20/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)