उसको देखनेसे उनको बड़ा आनन्द मिला। उनके मनमें कामवासना जाग्रत् हो गयी। थकावट दूर करनेके बाद उन्होंने बड़ी मधुर वाणीसे मुसकराते हुए उससे पूछा—॥ १०॥✎ 1646
तद्दर्शनप्रमुदितः संनिवृत्तपरिश्रमः।
पप्रच्छ कामसन्तप्तः प्रहसञ्श्लक्ष्णया गिरा॥ १०
उसको देखनेसे उनको बड़ा आनन्द मिला। उनके मनमें कामवासना जाग्रत् हो गयी। थकावट दूर करनेके बाद उन्होंने बड़ी मधुर वाणीसे मुसकराते हुए उससे पूछा—॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 96) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)