श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

तद्दर्शनप्रमुदितः संनिवृत्तपरिश्रमः।

पप्रच्छ कामसन्तप्तः प्रहसञ्श्‍लक्ष्णया गिरा॥ १०

taddarśanapramuditaḥ saṃnivṛttapariśramaḥ|

papraccha kāmasantaptaḥ prahasañślakṣṇayā girā|| 10

अर्थ

उसको देखनेसे उनको बड़ा आनन्द मिला। उनके मनमें कामवासना जाग्रत् हो गयी। थकावट दूर करनेके बाद उन्होंने बड़ी मधुर वाणीसे मुसकराते हुए उससे पूछा—॥ १०॥✎ 1646

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1646 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: जग-मगा → जगमगा

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