श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तं दुर्हृदं सुहृद्रूपं कामिनं क्षणसौहृदम्।

इन्द्रियाराममुत्सृज्य स्वामिनं दुःखिता ययौ॥ ८

taṃ durhṛdaṃ suhṛdrūpaṃ kāminaṃ kṣaṇasauhṛdam|

indriyārāmamutsṛjya svāminaṃ duḥkhitā yayau|| 8

अर्थ

उसने देखा कि यह तो बड़ा कामी है, इसके प्रेमका कोई भरोसा नहीं है और यह मित्रके रूपमें शत्रुका काम कर रहा है। अतः वह बकरी उस इन्द्रियलोलुप बकरेको छोड़कर बड़े दुःखसे अपने पालनेवालेके पास चली गयी॥ ८॥

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