जब उसकी कूएँमेंसे निकाली हुई प्रियतमा बकरीने देखा कि मेरा पति तो अपनी दूसरी प्रियतमा बकरीसे विहार कर रहा है तो उसे बकरेकी यह करतूत सहन न हुई॥ ७॥
तमेव प्रेष्ठतमया रममाणमजान्यया।
विलोक्य कूपसंविग्ना नामृष्यद् बस्तकर्म तत्॥ ७
जब उसकी कूएँमेंसे निकाली हुई प्रियतमा बकरीने देखा कि मेरा पति तो अपनी दूसरी प्रियतमा बकरीसे विहार कर रहा है तो उसे बकरेकी यह करतूत सहन न हुई॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.19.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 92) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/19/7/