वह बकरा बड़ा कामी था। वह सोचने लगा कि इस बकरीको किस प्रकार कूएँसे निकाला जाय। उसने अपने सींगसे कूएँके पासकी धरती खोद डाली और रास्ता तैयार कर लिया॥ ४॥✎ 1644
तस्या उद्धरणोपायं बस्तः कामी विचिन्तयन्।
व्यधत्त तीर्थमुद्धृत्य विषाणाग्रेण रोधसी॥ ४
वह बकरा बड़ा कामी था। वह सोचने लगा कि इस बकरीको किस प्रकार कूएँसे निकाला जाय। उसने अपने सींगसे कूएँके पासकी धरती खोद डाली और रास्ता तैयार कर लिया॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.19.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 92) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/19/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)