श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

नमस्तुभ्यं भगवते वासुदेवाय वेधसे।

सर्वभूताधिवासाय शान्ताय बृहते नमः॥ २९

namastubhyaṃ bhagavate vāsudevāya vedhase|

sarvabhūtādhivāsāya śāntāya bṛhate namaḥ|| 29

अर्थ

उसने भगवान्‌को नमस्कार करके कहा—‘समस्त जगत‍्के रचयिता, सर्वान्तर्यामी, सबके आश्रयस्वरूप सर्वशक्तिमान् भगवान् वासुदेवको नमस्कार है। जो परमशान्त और अनन्त तत्त्व है, उसे मैं नमस्कार करती हूँ’॥ २९॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धे एकोनविंशोऽध्यायः॥ १९॥

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