श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

इत्युक्त्वा नाहुषो जायां तदीयं पूरवे वयः।

दत्त्वा स्वां जरसं तस्मादाददे विगतस्पृहः॥ २१

ityuktvā nāhuṣo jāyāṃ tadīyaṃ pūrave vayaḥ|

dattvā svāṃ jarasaṃ tasmādādade vigataspṛhaḥ|| 21

अर्थ

परीक्षित्! ययातिने अपनी पत्‍नीसे इस प्रकार कहकर पूरुकी जवानी उसे लौटा दी और उससे अपना बुढ़ापा ले लिया। यह इसलिये कि अब उनके चित्तमें विषयोंकी वासना नहीं रह गयी थी॥ २१॥

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