श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

पूर्णं वर्षसहस्रं मे विषयान् सेवतोऽसकृत्।

तथापि चानुसवनं१ तृष्णा तेषूपजायते॥ १८

pūrṇaṃ varṣasahasraṃ me viṣayān sevato'sakṛt|

tathāpi cānusavanaṃ tṛṣṇā teṣūpajāyate|| 18

अर्थ

विषयोंका बार-बार सेवन करते-करते मेरे एक हजार वर्ष पूरे हो गये, फिर भी क्षण-प्रति-क्षण उन भोगोंकी लालसा बढ़ती ही जा रही है॥ १८॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    नुदिवसं।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 94)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें