श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

दत्त्वा स्वमुत्तरं वासस्तस्यै राजा विवाससे।

गृहीत्वा पाणिना पाणिमुज्जहार दयापरः॥ १९

dattvā svamuttaraṃ vāsastasyai rājā vivāsase|

gṛhītvā pāṇinā pāṇimujjahāra dayāparaḥ|| 19

अर्थ

उस समय वह वस्त्रहीन थी। इसलिये उन्होंने अपना दुपट्टा उसे दे दिया और दया करके अपने हाथसे उसका हाथ पकड़कर उसे बाहर निकाल लिया॥ १९॥

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