उस समय वह वस्त्रहीन थी। इसलिये उन्होंने अपना दुपट्टा उसे दे दिया और दया करके अपने हाथसे उसका हाथ पकड़कर उसे बाहर निकाल लिया॥ १९॥
दत्त्वा स्वमुत्तरं वासस्तस्यै राजा विवाससे।
गृहीत्वा पाणिना पाणिमुज्जहार दयापरः॥ १९
उस समय वह वस्त्रहीन थी। इसलिये उन्होंने अपना दुपट्टा उसे दे दिया और दया करके अपने हाथसे उसका हाथ पकड़कर उसे बाहर निकाल लिया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 88) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/18/19/