श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अहो निरीक्ष्यतामस्या दास्याः कर्म ह्यसाम्प्रतम्।

अस्मद्धार्यं धृतवती शुनीव हविरध्वरे॥ ११

aho nirīkṣyatāmasyā dāsyāḥ karma hyasāmpratam|

asmaddhāryaṃ dhṛtavatī śunīva haviradhvare|| 11

अर्थ

‘अरे, देखो तो सही, इस दासीने कितना अनुचित काम कर डाला! राम-राम, जैसे कुतिया यज्ञका हविष्य उठा ले जाय, वैसे ही इसने मेरे वस्त्र पहन लिये हैं॥ ११॥

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