॥ श्रीहरिः ॥
तस्य क्षेत्रे ब्रह्म जज्ञे शृणु वंशमनेनसः।
शुद्धस्ततः३ शुचिस्तस्मात् त्रिककुद् धर्मसारथिः॥ ११
tasya kṣetre brahma jajñe śṛṇu vaṃśamanenasaḥ|
śuddhastataḥ śucistasmāt trikakud dharmasārathiḥ|| 11
अर्थ
अक्रियकी पत्नीसे ब्राह्मणवंश चला। अब अनेनाका वंश सुनो। अनेनाका पुत्र था शुद्ध, शुद्धका शुचि, शुचिका त्रिककुद् और त्रिककुद्का धर्मसारथि॥ ११॥
तस्य क्षेत्रे ब्रह्म जज्ञे शृणु वंशमनेनसः।
शुद्धस्ततः शुचिस्तस्मात् त्रिककुद् धर्मसारथिः॥ ११
अक्रियकी पत्नीसे ब्राह्मणवंश चला। अब अनेनाका वंश सुनो। अनेनाका पुत्र था शुद्ध, शुद्धका शुचि, शुचिका त्रिककुद् और त्रिककुद्का धर्मसारथि॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.17.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 85) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/17/11/टिप्पणियाँ
- ३
शुद्धः शुचिस्ततस्तस्मा०।
(मुद्रित पृष्ठ 85)