श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

इतीमे काशयो भूपाः क्षत्रवृद्धान्वयायिनः।

रम्भस्य१ रभसः पुत्रो गम्भीरश्‍चा२क्रियस्ततः॥ १०

itīme kāśayo bhūpāḥ kṣatravṛddhānvayāyinaḥ|

rambhasya rabhasaḥ putro gambhīraścākriyastataḥ|| 10

अर्थ

ये सब-के-सब क्षत्रवृद्धके वंशमें काशिसे उत्पन्‍न नरपति हुए। रम्भके पुत्रका नाम था रभस, उससे गम्भीर और गम्भीरसे अक्रियका जन्म हुआ॥ १०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    नाभस्य।

    (मुद्रित पृष्ठ 85)
  2. २

    श्‍चक्रकस्ततः।

    (मुद्रित पृष्ठ 85)

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