श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

गाधेरभून्महातेजाः समिद्ध इव पावकः।

तपसा क्षात्रमुत्सृज्य यो लेभे ब्रह्मवर्चसम्॥ २८

gādherabhūnmahātejāḥ samiddha iva pāvakaḥ|

tapasā kṣātramutsṛjya yo lebhe brahmavarcasam|| 28

अर्थ

महाराज गाधिके पुत्र हुए प्रज्वलित अग्‍निके समान परम तेजस्वी विश्‍वामित्रजी। इन्होंने अपने तपोबलसे क्षत्रियत्वका त्याग करके ब्रह्मतेज प्राप्त कर लिया॥ २८॥

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