श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.40

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

क्षमया रोचते लक्ष्मीर्ब्राह्मी सौरी यथा प्रभा।✎ 1135

क्षमिणामाशु भगवांस्तुष्यते हरिरीश्‍वरः॥ ४०

kṣamayā rocate lakṣmīrbrāhmī saurī yathā prabhā|

kṣamiṇāmāśu bhagavāṃstuṣyate harirīśvaraḥ|| 40

अर्थ

ब्राह्मणोंकी शोभा क्षमाके द्वारा ही सूर्यकी प्रभाके समान चमक उठती है। सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि भी क्षमावानोंपर ही शीघ्र प्रसन्‍न होते हैं॥ ४०॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1135 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): लक्ष्मीर्ब्ह्मी → लक्ष्मीर्ब्राह्मी

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