श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.37

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

स्वकर्म तत्कृतं रामः पित्रे भ्रातृभ्य एव च।

वर्णयामास तच्छ्रुत्वा जमदग्‍निरभाषत॥ ३७

svakarma tatkṛtaṃ rāmaḥ pitre bhrātṛbhya eva ca|

varṇayāmāsa tacchrutvā jamadagnirabhāṣata|| 37

अर्थ

और माहिष्मतीमें सहस्रबाहुने तथा उन्होंने जो कुछ किया था, सब अपने पिताजी तथा भाइयोंको कह सुनाया। सब कुछ सुनकर जमदग्‍नि मुनिने कहा—॥ ३७॥

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