श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.36

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

अग्‍निहोत्रीमुपावर्त्य सवत्सां परवीरहा।

समुपेत्याश्रमं पित्रे परिक्लिष्टां समर्पयत्॥ ३६

agnihotrīmupāvartya savatsāṃ paravīrahā|

samupetyāśramaṃ pitre parikliṣṭāṃ samarpayat|| 36

अर्थ

परीक्षित्! विपक्षी वीरोंके नाशक परशुरामजीने बछड़ेके साथ कामधेनु लौटा ली। वह बहुत ही दुःखी हो रही थी। उन्होंने उसे अपने आश्रमपर लाकर पिताजीको सौंप दिया॥ ३६॥

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