श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.20

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

स्त्रीरत्‍नैरावृतः क्रीडन् रेवाम्भसि मदोत्कटः।

वैजयन्तीं स्रजं बिभ्रद् रुरोध सरितं भुजैः॥ २०

strīratnairāvṛtaḥ krīḍan revāmbhasi madotkaṭaḥ|

vaijayantīṃ srajaṃ bibhrad rurodha saritaṃ bhujaiḥ|| 20

अर्थ

एक बार गलेमें वैजयन्ती माला पहने सहस्रबाहु अर्जुन बहुत-सी सुन्दरी स्त्रियोंके साथ नर्मदा नदीमें जल-विहार कर रहा था। उस समय मदोन्मत्त सहस्रबाहुने अपनी बाँहोंसे नदीका प्रवाह रोक दिया॥ २०॥

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