श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

योगेश्‍वरत्वमैश्‍वर्यं गुणा यत्राणिमादयः।

चचाराव्याहतगतिर्लोकेषु पवनो यथा॥ १९

yogeśvaratvamaiśvaryaṃ guṇā yatrāṇimādayaḥ|

cacārāvyāhatagatirlokeṣu pavano yathā|| 19

अर्थ

वह योगेश्‍वर हो गया था। उसमें ऐसा ऐश्‍वर्य था कि वह सूक्ष्म-से-सूक्ष्म, स्थूल-से-स्थूल रूप धारण कर लेता। सभी सिद्धियाँ उसे प्राप्त थीं। वह संसारमें वायुकी तरह सब जगह बेरोक-टोक विचरा करता॥ १९॥

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