उनका यज्ञ पूरा करके मैं तुम्हारे पास आऊँगा। तबतक तुम मेरी प्रतीक्षा करना।’ यह बात सुनकर राजा निमि चुप हो रहे और वसिष्ठजी इन्द्रका यज्ञ कराने चले गये॥ २॥
तं निर्वर्त्यागमिष्यामि तावन्मां प्रतिपालय।
तूष्णीमासीद् गृहपतिः सोऽपीन्द्रस्याकरोन्मखम्॥ २
उनका यज्ञ पूरा करके मैं तुम्हारे पास आऊँगा। तबतक तुम मेरी प्रतीक्षा करना।’ यह बात सुनकर राजा निमि चुप हो रहे और वसिष्ठजी इन्द्रका यज्ञ कराने चले गये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.13.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 66) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/13/2/