श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.12.7

नवम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्मात् ३प्रसुश्रुतस्तस्य सन्धिस्तस्याप्यमर्षणः।✎ 1871

महस्वांस्तत्सुतस्तस्माद् विश्‍वसाह्वोऽन्वजायत॥ ७

tasmāt prasuśrutastasya sandhistasyāpyamarṣaṇaḥ|

mahasvāṃstatsutastasmād viśvasāhvo'nvajāyata|| 7

अर्थ

मरुसे प्रसुश्रुत, उससे सन्धि और सन्धिसे अमर्षणका जन्म हुआ। अमर्षणका महस्वान् और महस्वान्का विश्‍वसाह्व॥ ७॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    तस्मात् प्रश्रुतपुत्रस्तु सन्धि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 65)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1871 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): तस्मात्प्रसु → तस्मात् प्रसु

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