श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.12.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

पुष्यो हिरण्यनाभस्य ध्रुवसन्धिस्ततोऽभवत्।

सुदर्शनोऽथाग्‍निवर्णः शीघ्रस्तस्य मरुः सुतः॥ ५

puṣyo hiraṇyanābhasya dhruvasandhistato'bhavat|

sudarśano'thāgnivarṇaḥ śīghrastasya maruḥ sutaḥ|| 5

अर्थ

हिरण्यनाभका पुष्य, पुष्यका ध्रुवसन्धि, ध्रुव-सन्धिका सुदर्शन, सुदर्शनका अग्‍निवर्ण, अग्‍निवर्णका शीघ्र और शीघ्रका पुत्र हुआ मरु॥ ५॥

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