॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.10.54
ना१धिव्याधिजराग्लानिदुःखशोकभयक्लमाः।
मृत्युश्चानिच्छतां नासीद् रामे राजन्यधोक्षजे॥ ५४
nādhivyādhijarāglāniduḥkhaśokabhayaklamāḥ|
mṛtyuścānicchatāṃ nāsīd rāme rājanyadhokṣaje|| 54
अर्थ
इन्द्रियातीत भगवान् श्रीरामके राज्य करते समय किसीको मानसिक चिन्ता या शारीरिक रोग नहीं होते थे। बुढ़ापा, दुर्बलता, दुःख, शोक, भय और थकावट नाममात्रके लिये भी नहीं थे। यहाँतक कि जो मरना नहीं चाहते थे, उनकी मृत्यु भी नहीं होती थी॥ ५४॥✎ 1640
टिप्पणियाँ
- १
नाधिर्व्याधिर्जरा ग्लानिर्दुःख०।